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हमको समझेगा क्या जमाना

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहे जितना तुम मेरे पास रहो ,
        
                                                    
                            
रोज करो मेरे घर आना जाना
हम कवि हैं, हमको समझना बहुत मुश्किल है मेरे दोस्त
हम खुद को नहीं समझे, हमको समझेगा क्या जमाना

अगर तुम हमारा लिखा समझ जाओ तो , बड़ी बात है
अगर नहीं समझे तो ,तुम्हारा दिन है, तुम्हारी रात है

हम नहीं जानते कब क्या कर देंगे कमाल
हम तुम्हारे जैसे थोड़े है बदहाल

हमारे जैसे तुम भी हो जाओ
पहले तुझको मरने आता है बतलाओ

हमको मौत से नहीं लगता है डर
हम मर कर भी जिंदा रहते है ,
मर कर भी हो जाते है अमर

हमने खुद को किसी के हवाले किया है,
हमने खुद को बेच दिया है
उससे मत टकराना जिसने अपनी जान का सौदा किया है

हमको सदियों याद किया जाता है,
हम इस दुनिया से चले जाते है,
सब के दिल में बनकर अपना ठिकाना
हम कवि है, हमको समझना बहुत मुश्किल है मेरे दोस्त
हम खुद को नही समझे, हमको समझेगा क्या जमाना
-रविन्द्र अमन
2 घंटे पहले
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