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अमन- सा दिल

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमको संगदिल जमाने से नहीं चाहिए भीख
        
                                                    
                            
अगर हुनर रखते हैं तो, हर कुछ कर लेंगे हासिल

इस जमाने में खूब चलेगा अपना जलवा
हमारे कदमों को चूमेगी हमारी मंजिल

कुछ ऐसा है रुतबा इस जमाने में हमारा
हमारे घर से आकर खाली हाथ लौट जाएगा मेरा कातिल

खूब सीखा है हमने डूब कर उभरना
हम वो कश्ती नही जिसको चाहिए साहिल

हमको मत दिखाना हसीं सपनों का नजारा
हर हाल में जी लेंगे ,खुद को किया है इस काबिल

मिलते है किसी से हम इस कदर प्यार से
आए हमारे घर कभी तो ,शर्माती है हर मुश्किल

तुम भी रखो ना इस दुनिया को अपनी जेब में
पर अपने पास रखो थोड़ा अमन - सा दिल
-रविन्द्र अमन
8 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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