बिन बाती दीपक जले केसी,
और न हो घी तो फिर जले कैसी
बिन राधा भक्ति के कृष्ण मिले कैसी
और न हो भक्ति में भाव
तो फ़िर मिले कैसी
-रंजीत चाहर