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मेरे क़रीब न आओ की जल रहा हूं मैं

Quazi Tanveer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वफ़ा में मोम की सूरत पिघल रहा हूं मैं
        
                                                    
                            
मेरे क़रीब न आओ कि जल रहा हूं मैं

फ़रेब-ए-वक़्त का एहसां है दोस्तों मुझ पर
दहकते आग के शोलों पे चल रहा हूं मैं

तू मेरे अज़्म का क्या हौसला दबाएगा
ठहर कि वक़्त हूं करवट बदल रहा हूं मैं

किसी के वादों ने इतना तो लुत्फ़ बख़्शा है
उम्मीद ओ यास के साए में पल रहा हूं मैं

ये मेरा रूप मुकम्मल नही है ऐ लोगों
अभी तो नूर हूं सांचे में ढल रहा हूं मैं

न हम सफ़र है कोई और न कारवां तनवीर
वफ़ा की राह में तन्हा ही चल रहा हूं मैं

- क़ाज़ी तनवीर
4 वर्ष पहले
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