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pushpendra Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कि घोर अंधेरा था मै सुबह का कोई पता नहीं
        
                                                    
                            
वो भी एक चिराग़ ही तो था कब तलक रौशनी देता

:-पुष्पेंद्र
3 वर्ष पहले
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