घरेलू हिंसा का यह कैसा प्रकोप
आजकल घर घर में छाया है |
सच कहती है दुनिया,सच कहते
हैं लोग घोर कलयुग आया है |
पहले तो सिर्फ महिलाओं पर ही
होते थे तमाम तरह के अत्याचार |
अक्सर महिलाएं ही बनती थी
घरेलू हिंसा का पूर्णत: शिकार |
पर आज कल तो पुरुष वर्ग भी
घरेलू हिंसा का हो रहा है शिकार |
अब तो पुरुषों के साथ भी हो रहा
है महिलाओं के जैसा दुर्व्यवहार |
बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती
बच्चे बुढ़े भी घरेलू हिंसा से परेशान है |
नवजात शिशुओं से लेकर बुढ़े बुजुर्ग
भी इह समस्या से हो रहे हैरान है |
आज की सभ्य,पढ़ी लिखी माँ अपने
ही जने बच्चों का कर रही है शोषण |
अनपढ़ बवांर पहले की माताओं की
तरह नहीं करती बच्चों का भरण पोषण |
आज की कलयुगी माताओं पर प्रेम
का चढ़ रहा है बुखार कुछ ऐसा |
कि अपने पति,पूत,पुत्री लगते हैं
उसे मानो कोई बड़ा दुश्मन हो जैसा |
बुजुर्ग माता पिता की भी आज के
युग में बड़ी ही करुण कहानी है |
अपने ही बेटे और बहु के दुर्व्यवहार
से आंखों में भर जाता खारा पानी है |
मार पीट गालियाँ और ताने बड़ा
ही आक्रामक हो रहा व्यवहार है |
नारी हो या पुरुष सब घरेलू हिंसा
का दिन प्रतिदिन हो रहे शिकार हैं |
कभी मां बाप को वृद्धावस्था में
वृद्धाआश्रम के कुएं में ढकेला गया |
तो कभी दहेज की आड़ में निर्दोष
नारी को आग की ज्वाला में ठेला गया |
शादी के पवित्र रिश्ते की आड़ में यौन
शोषण का अधिकार जताया जाता हैं |
कभी मदिरा पान तो कभी नशीली
दवाओं का जबरन सेवन कराया जाता हैं |
कभी चंद रुपयो के लिए पर पुरुष
को सौंप देते हैं अपनी अर्धांगिनी को |
तो कभी तरक्की की लालसा में दे देते
हैं जबरन बॉस के पास अपनी पत्नी को |
पत्नी आवाज उठाए इसके खिलाफ
तो मायके वालों से डिमांड करते हैं |
तुम्हारे माँ बाप ने आखिर दिया ही
क्या है ऐसे ताने फिर हर रोज कसते हैं |
यूँ तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए
बनाए है सरकार ने कितने ही कानून |
पर फिर भी खत्म होता ही नहीं किसी
सूरत ए हाल घरेलू हिंसा का हिंसात्मक जुनून |
-पुष्पा साहू