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पुरु के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तक आग्रह शेष है, नहीं समर्पण जान।
        
                                                    
                            
जो कुछ भी तब हो रहा, स्वार्थ निहित पहचान।।
--डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
2 महीने पहले
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