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डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घूमें चित्ताकाश में, असंख्य भाव तरंग।
        
                                                    
                            
जीव देखता जब जिसे, धरे रूप बहिरंग।।
-. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
11 घंटे पहले
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