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सच कहूँ

Puneet Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच कहूँ तो उड़ना
        
                                                    
                            
मुझे परिंदे की तरह है।
सच कहूँ तो बहना
मुझे कश्ती की तरह है।
सच कहूँ तो मुझे अपना
ठिकाना ढूँढना है।
सच कहूँ मुझे अपना
किनारा ढूँढना है।
सच कहूँ तो जुगनू की तरह
चमकना नहीं है।
सच कहूँ तो श्वानः की तरह
भटकना नहीं है।
सच कहूँ मुझे सूरज की तरह
जलना भी है।
सच कहूँ उसी की तरह
मुझे चमकना भी है।
सच कहूँ तो अभी
कविता लिख रही हूँ,
सच कहूँ तो अपना
भाग्य भी खुद ही लिखना है।
— सृष्टि पाण्डेय
2 महीने पहले
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