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मैं अनशन हूँ

Punam Pathak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं अनशन हूँ =
        
                                                    
                            
मैं अनशन हूँ खतरनाक हूँ
खतरा हूँ जानलेवा हूँ।
किस लिए करते हो अनशन
जान लो यह तुम पहचान लो।
किसके लिए करते अनशन
उनको भी पहचान लो तुम।
मैं अनशन हूँ आवाज हूँ
मौन शोर भूख हड़ताल हूँ।
वजन कम डिहाइड्रेशन होगा
ब्लड शुगर ब्लड प्रेशर भी होगा।
शरीर हो जाएगा कमजोर
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होगा।
क्या सचमुच वे लोग तुम्हारे हैं
जिनके लिए करते हो अनशन।
वे भूल गए भगत सिंह चंद्रशेखर
न जाने कितने क्रांतिकारियों को।
गर याद होता त्याग शहीदों का
क्यों करना पड़ता किसी को अनशन।
शिक्षा रोए और अशिक्षा हँसे
उस पर कोई अनशन क्यों करें।
पेपर बिकते छात्र रोते रोते माँ- बाप
कितनों ने खुद को खोया पिघले न वे राम ।
देख बड़े को छोटों ने अपनाया अनशन
भविष्य दाव पर देखकर अपनाया अनशन।
धरती सूरज सी तपेगी
हरियाली बिल्कुल न रहेगी।
सबको ही जब फिक्र नहीं है
क्यों एक मरे हरियाली को?
कितने लोग पेड़ों से लिपट मर गए
कोरोना भूल गए वे क्यों मर गए।
मैं अनशन हूँ मैं कोई खेल नहीं
आती जाती ट्रेनों का मेल नहीं।
सूखो चाहे मिट्टी में तुम मिलो
वे झुकेंगे वायदा नहीं करता।
आखिर क्या जरूरत झुकाने की
आँख नाक कान उनके पास हैं।
उनकी धरा, सूरज चाँद क्या अलग हैं
प्रकृति उनके लिए कुछ अलग उगलेगी?
यह अंग्रेजों का काल तो नहीं है?
कोई अपनों का जाल तो नहीं है।
रोज खत लिखोगे उनको हिंद
वे खत खत रद्दी हो जाएंगे।
मैं अनशन हूँ पीड़ा खूब समझता हूँ
तुम मरने को तैयार क्या कर सकता हूँ।
दिन वर्ष या आमरण करो अनशन
दिल पिघलते नहीं पिघलते यंत्र।
मैं अनशन हूँ किसी को तोड़ता नहीं
अति हो तो किसी को मैं छोड़ता नहीं।
मुझ अनशन को अपनाओ
पर अपने प्राण बचाओ।
बहुत कुछ है अच्छा करने को
जागो और तुम जग जगाओ।
-पूनम पाठक 
3 महीने पहले
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