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याद आती है

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            याद आती है
        
                                                    
                            

(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
याद आती है
याद आते हैं
पेड़ गाते हुए
तैरते जाता हुआ सूरज ।

समय फिर से छतों पर भागता
तुम्हे याद हैं -ये रहमतें!
कैसे पा लूँ छुटकारा इन संगीतों से
जो खींच याद में ला देते गुज़रा एक जमाना
हाँ , बिना कुछ मज़े बताये ।
याद मगर आती है
याद मगर आती है !


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6 वर्ष पहले
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