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अनछुये ख्वाब

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अनछुये ख्वाब
        
                                                    
                            

(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
हरेक रात एक तारा छूता है मेरी पलकें
और निकलता है चाँद -भौहों से ।

रुह के दर पे दे आहट
दुःखभरी रात चली आती मेहमान बनी,
आँखों में।
क्योंकि मुहब्बत है यहाँ ,
हर रात अनदेखी तो नहीं कर सकते!

अनछुये ख्वाब
मेरे सीने पर दे छाप,
खींच ले जाते भरे आसमान
अरे, आप तो हैं ही नहीं मेरे पास
और हम अकेले तो उड़ नहीं सकते !
(मूल: वर्जिन ड्रीम्स)


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