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ईश्वर निद्रामग्न हुए बैठे हैं

Professor Ravindra Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ईश्वर निद्रामग्न हुए बैठे हैं
        
                                                    
                            

(अज़ाम अबीदोव की कविता
मूल कवि : अज़ाम अबीदोव
काव्यानुवादक : प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह)
बूढा साँप चढ़ा बैठा मेरे कन्धों पर
खोल नहीं सकता मैं आँखें
न होठों को तनिक हिलाऊँ
करने परवरदिगार का शुक्राना।
करैला भी देखो चढ़ा नीम
बारिश होती मूसलाधार
फ़ैल रहा हूँ देखो मैं
इससे ज्यादा क्या कहें और
मेरे बोझिल दिल में ईश्वर
निद्रामग्न हुए बैठे हैं !


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