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कुछ ख़्वाब अभी बाक़ी हैं

Priyanshu Saini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ ख़्वाब अभी बाक़ी हैं,
        
                                                    
                            
कुछ राहें अभी अधूरी हैं,
मंज़िल चाहे दूर सही,
पर कोशिशें कहाँ मजबूरी हैं।

जो गिरकर भी संभल जाए,
वही सफ़र का मुसाफ़िर है,
हर रात के बाद सवेरा हो,
यही उम्मीद ही तो ज़िंदगी है।

लोगों ने रोकना चाहा तो
हमने चलना सीख लिया,
जिसने हमें कमज़ोर समझा,
उसी से लड़ना सीख लिया।

अब हार से डरते नहीं,
जीत का अभिमान भी नहीं,
बस अपने कल को बेहतर करना है,
किसी से कोई मुकाबला नहीं।

कुछ सपने आँखों में हैं,
कुछ अरमान अभी बाक़ी हैं,
ज़िंदगी ने बहुत कुछ सिखाया,
पर सीखने के इम्तिहान अभी बाक़ी हैं।

 
एक महीने पहले
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