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एक दिन का देशभक्त

priyanka singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हो गई देशभक्ति पूरी,
        
                                                    
                            
मना लिया स्वतंत्रता दिवस,
जगा लिया भीतर का देशभक्त,
सजा लिया घर,दुकान,कारखाना,
लहराया तिरंगा पूरे जोश से।

सुन लिए शहीदों के गीत,
बहा लिए दो-चार आँसू,
कैमरे के सामने सिर झुका लिया,
और समझ लिया
हमने देश के लिए बहुत कुछ कर दिया।

अब ज़रा रुक कर देखो…
वो तिरंगा,
जो कल तक माथे से लगाया था,
आज फट कर तारों से लटक रहा है,
या ज़मीन पर गिरा
तुम्हारे पैरों तले रौंदा जा रहा है।

कहो,
कहाँ चली गई तुम्हारी देशभक्ति?
कहाँ गया वो दर्द
जो शहीदों के नाम पर उमड़ा था?

अगर बस एक दिन के लिए ही
तिरंगे को सम्मान दे सकते हो,
तो मत लगाओ उसे।
लेकिन उसे अपमानित मत करो।

मत बनाओ उस झंडे को
दिखावे की चीज़,
जिसके लिए किसी ने
अपनी साँसें कुर्बान कर दीं।

देशभक्ति शोर नहीं होती,
ना ही सिर्फ छुट्टी का उत्सव।
वो तो आदर है
हर दिन, हर पल,
तिरंगे के लिए,
और उस मिट्टी के लिए
जिसे वो रंग अपने लहू से सींच गए।

अगर सच में देश से प्यार है,
तो तिरंगे को उतारना भी सीखो,
संभाल कर रखना भी सीखो,
और सबसे ज़रूरी
उसे रौंदने से पहले
अपने ज़मीर को रोकना सीखो।
2 महीने पहले
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