विज्ञापन

पापा का प्यार

Priya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर के मुखिया वो कहलाते,
        
                                                    
                            
सुख में सबका साथ निभाते।
दुख में ढाल बनकर खड़े हो जाते,

जब भी बाहर से घर आते,
कुछ न कुछ खाने को ज़रूर लाते।
बिन बोले ही हर बात समझ जाते,
दिल की हर ख़ामोशी पढ़ जाते।

खुद धूप में चलकर,
हमें हमेशा छाँव देते हैं।
चेहरे पर मुस्कान रखकर,
हर ग़म को चुपचाप सह लेते हैं।

परिवार की खुशियों को पहले निभाते,
फिर क्यों अपनी ख़्वाहिशें दबा जाते?

पल भर में दिल टूट जाए
जब अपने ही ये सवाल करे -
क्या ही किए है मेरे लिए?
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile