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एक नाव पर बैठा हूँ मैं

Prem Verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक नाव पर बैठा हूँ मैं
        
                                                    
                            
एक नाव पर बैठा हूँ मैं
केवट पतवार का सहारा है
लकड़ी का नाव, कुछ पुराना है
मैं भी कौन सा नया हूँ?
एक नाव पर बैठा हूँ मैं …..

नदी की तेज या सुस्त धार में
केवट के अनुभव का क़ायल मैं
वह कहता,मैं सबको पार लगाता हूँ
चाहे किनारा दूर हो या नज़दीक।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….

भँवर में भी फँस जाये अगर
धार की दिशा समझता वही
पतवार है शक्ति ,बीच नदी में
विश्वास बहुत है केवट पर।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….

नाव तो मेरा जीवन है
केवट है परमात्मा मेरा
पतवार है उपासना उसकी
भवसागर पार उतारेगा।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….
-प्रेम वर्मा
एक महीने पहले
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