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इज़हार ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके शुमार तू दर्द मेरा फासला क्यूं बढ़ा रहे हो गुज़ार दी मैने जिंदगी कांटों को राह पर समझ क्यूं नही पा रहे हो
        
                                                    
                            
जिंदगी मेरी अता तेरी करूं राह ए तलब कब तक ऐतबार तुझ पर देकर वादे हज़ार हमें निभा क्यूं नहीं पा रहे हो
सच ये मिजाज़ भी रहा तेरा अजीब बहुत बना के मुजरिम हमें किया जो जुल्म मुझ पर छिपा क्यूं नहीं पा रहे हो
बांध के कमर तैयार बैठे हम तेरे इंतजार में जिंदगी इक मसला है और ये सच भी आप समझ क्यूं नहीं पा रहे हो
जला कर चिराग़ ए दिल बहलाऊं दिल कब तक निभाया रस्म ए वफा शिद्दत से तुम समझ क्यूं नही पा रहे हो

 
10 घंटे पहले
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