मिटा के अरमां दिल के तुमसे दर्द मैं सकता नहीं जो होगा देखा जायेगा सोच कर चिराग ए दिल मैं बुझा सकता नहीं
मेरी बदनामियों पर हसने वाले अंदाज आपका समझ ना पाया मैं देकर ताने बार बार अब और तू सता सकता नहीं
मुसीबत में आया काम कब कोई अंजाम सोचना पड़ा बढ़ा कर बेताबियाँ मेरी ही दर्द और कभी तू बढ़ा सकता नहीं
करके बर्बाद जिंदगी सदमेें हज़ार देने वाले मिजाज़ तेरा समझ ना पाया कभी करूं क्या फर्ज और निभा सकता नहीं
सितम अब ये है हर आने जाने वालों में चेहरा तेरा मैं ढूंढने लगा चल कर दो कदम साथ तेरे दर्द और बढ़ा सकता नहीं