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फसाना ए वादा ए उल्फत

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुजरती है अब हर रात मेरी पिछली रातों की तरह मिला ना साथ तेरा कभी पिछले वादों की तरह
        
                                                    
                            
होकर मजबूर तमन्ना दिल की मिटाने लगे मगर दिल में तो है अंधेरा अभी भी गुजरे रातों की तरह
तू कैसा दरिया जो प्यासा अभी तक गुजरा जो हादसा अभी अभी भूल गया पिछले वादों की तरह
मिल ना सकेगा दिल से कभी है यकीं मुझे शायद तू भी अब मुझे भुला देगा पिछले यादों की तरह
दर्द दिया तूने दिल को बहुत अभी तक गजब ये सामने खड़ा और भुला दिया पिछले रातों की तरह
एक दिन पहले
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