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फसाना ए रस्म ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जख्म मेरे भर चुके हैं कभी आकर कोई नया जख्म दे जाओ मगर आने से पहले कसूर बता जाओ
        
                                                    
                            
निगाह ए नाज़ अब गिला मैं तुमसे क्या करूं कभी बदल के मिजाज़ तुम ही तलबगार मेरे हो जाओ
अचानक दिल देकर मुंह मोड़ना अच्छा नहीं सेहत के लिए कभी दिल लगा कर तुम मेरे हो जाओ
हमें भी हर आइना में चेहरा तेरा दिखने लगा बढ़ा कर अरमां मेरा कभी तुम ही खबरदार हो जाओ
बता भी दो कितने दिन और जुल्म मुझ पर रहेगा तेरा कभी तो बदल कर मिजाज़ बेखबर हो जाओ
7 घंटे पहले
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