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फसाना ए रस्म ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सदमें दिल के बढ़ाए हैं अब ना रहे हम किसी काम के सोच कर चिराग़ ए दिल अपना आज बुझाए हैं
        
                                                    
                            
खाकर साथ तेरे जीने की कसम हम ही पछताए हैं करके शुमार लम्हें इंतजार के आज हम घबराए हैं
हक जीने का छीन कर खुश हो तुम आज़ बहुत जान कर आज अंदाज़ ए बेरुखी तेरा दर्द हम बढ़ाए हैं
अच्छा है करके तू सितम मुझ पर मिजाज़ खानदानी कर लो ना कर तू गुफ्तगू चिराग़ ए दिल बुझाए हैं
साथ दो या ना दो कोई बात नहीं खोकर होश ओ हवास अपना तोड़ कर दिल सामने तेरे हम आए हैं
एक घंटा पहले
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Shivam Awasthi

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