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फसाना ए नसीब

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं मुफलिसी में किस्मत की लकीरों पे भरोसा करने क्यूं लगा ये जानते हुए लकीरों का काम है खेल खेलना
        
                                                    
                            
मुझे इंकार करने वाले जो दर्द दिया तूने कोई गम नहीं लिखा है मेरी किस्मत में ही आंसुओं से खेल खेलना
या खुदा कभी फुर्सत में सदा मेरी भी याद कर लेना मेरा क्या सीखा है मैने भी तो अब गमों से खेल खेलना
कभी सोचा लोग तुम पर भरोसा क्यूं करते हैं किसी बेगुनाह पे जुल्म करने से पहले रहमों से खेल खेलना
निगाह मेरी हर रोज तेरा राह देखती है मुझ पर कोई जुल्म करने से पहले तुम मेरी सदा से खेल खेलना
 
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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