विज्ञापन

फसाना ए मासूम दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना जंग में ना अदावत पे यकीं करता हूं मैं हूं शरीफ इंसान और इंसानियत पे यकीं करता हूं
        
                                                    
                            
अपनी मुफलिसी पे भी मैं घबराता कभी नहीं जीने के लिए मैं हमेशा मेहनत पे यकीं करता हूं
मुझे दर्द देने वाले जो दर्द तूने दिया कोई बात नहीं मैं अपना दर्द ही अब पीने पे यकीं करता हूं
मैं तो इक फकीर हूं काम है मेरा सदा देना मैं तो अब गम ए फिराक में जीने पे यकीं करता हूं
ऐ खुदा मुझ पर कभी एहसान कर दिया करो मैं तो कातिलों को भी दुआ देने पे यकीं करता हूं
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile