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फसाना ए मासूम दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके याद महरूमी मुसीबतों से भी दिल लगाया मैने समझ के अब अपना आज दर्द सारा मैने याद दिलाया तुम्हें
        
                                                    
                            
मैं भी इतना खुश नसीब कहां जो बात दिल की कह सकूं तुम्हें मुझको दर ब दर करने वाले सच मैने बताया तुम्हें
सता कर बदनाम हमें करने वाले तुम तो खुश बहुत नज़र आए हो परख कर अंजाम ए वफा दर्द मैने सुनाया तुम्हें
बदनसीबी से बढ़ कर कोई सजा नहीं ये तुम भी जानते हो बुझा के चिराग़ ए दिल हुआ जो दर्द याद दिलाया तुम्हें
कहूं सच कैसे तुम्हें खुशी मेरी अचानक रास आज आई है जान कर अपना गुज़रा जमाना मैने याद दिलाया तुम्हें

 
3 महीने पहले
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