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फसाना ए गर्दिश ए हालात

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर पर ही रहे तुझको याद करते हुए और मैं घर से न कहीं और जा सका कारवां में बगैर तेरे होते हुए
        
                                                    
                            
मैं किसका नाम लेता और नाम किसका न लेता तेरे होते हुए हजार फूल खिल उठे आज तेरे होते हुए
दिल कश्मकश में जैसे हवा की जद में चिराग बेसहारा अपना भी तो वही हाल है करीब तेरे होते हुए
है खबर राह ए तलब कांटों पे मैं चल रहा बगैर हमसफर के मगर मंजिल का पता नहीं बगैर तेरे होते हुए
हिदायतों का था मोहताज दिल मेरा मगर न कह सका कभी आंसुओं पे जो गुज़रा है रात तेरे होते हुए
3 महीने पहले
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