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फसाना ए गम ए जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिन ढल गया तेरी याद में इक नया जख्म खाना चाहता हूं मिटा कर अरमां मैं मरना चाहता हूं
        
                                                    
                            
रुला देती है अक्सर हमें दिल की बेचैनियाँ मैं आकर पास तेरे अर्ज अदब से करना चाहता हूं
दिल मेरा तोड़ना कोई मुश्किल नहीं तेरे लिए गर सर मेरा रहे सलामत तो ये कहना चाहता हूं
मिल कर तुमसे बिछड़ना भी हादसा था मैं दर पे दिया जला के इंतजार तेरा मैं करना चाहता हूं
गर तू न मिला दिल से तो दर्द और बढ़ा लूंगा मैं अब तुमसे ही किस्सा ए गम कहना चाहता हूं
19 घंटे पहले
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