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फसाना ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टकरा कर तूफानों से दिल को हम समझाने लगे हैं रोने से होगा कुछ नहीं आफतों से ही हम खेलने लगे हैं
        
                                                    
                            
देकर अपने हिस्से की बेचैनियाँ तुमसे ही कुछ कहना चाहता हूं और जान के गैर हमें आप दर्द देने लगे हैं
फिक्र में रोना मुनासिब नहीं बेचैन दिल को समझाना पड़ा और डूबा के हमें तन्हाई में नसीहतें देने लगे हैं
है गुरुर कितना अंदाज़ ए बेरुखी पर करके हमसे ही वादे हज़ार आप अब अंदाज अपना बदलने लगे हैं
दर्द ये भी फसाना ए दिल सिवा आपके गैरों से कह सकता नहीं लगा के नसीब दांव पे अर्ज करने लगे हैं

 
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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