आकर ख्वाब महल में आस जीने का जगाए दर्द हमें देने वाले करके याद गुज़रा जमाना चिराग ए दिल हम जलाए हैं
लगता करके याद गुज़रा ज़माना सुना रहा हमें दास्तां कोई और गुजरे दिनों की ओट में झांक कर दिल हम बहलाए हैं
आप क्या सोच कर पूछने लगे हाल ए गम मेरा रहेगा कब तक सफर में छांव तारों की ये सोच कर दिल हम सताए हैं
जाओ चिराग़ ढूंढ लो कहीं ठिकाना अपना करके सफर समंदर का मिटा कर अरमां सारे दर्द कुछ और हम बढ़ाए हैं
भांप कर बेचैनी पूछा चीखती हवाओं ने हाल मेरा अपना हाल वही जो पहले था सोच कर चिराग ए दिल बुझाए हैं