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फसाना ए दर्द ए महरूमी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फसाना ए बेचैन ज़िंदगी अपनी तुम्हें हम समझाने लगे हैं बढ़ा कर फासला तुमसे मिलेगा कुछ नहीं ये सोचने लगे हैं
        
                                                    
                            
किया जो फैसला तुने खिलाफ मेरे अंजाम सोचने लगे समझा कर बेचैन दिल को खुद को ही आईना दिखाने लगे हैं
मेरी बरबादियों ने घुट घुट के जीना सीखा दिया करके महसूस इशारा आपका अब चिराग़ ए दिल हम बुझाने लगे हैं
मेरी बेचैनियोँ ने तो दर्द सहना सीखा दिया ना जाने किस तरह से दिल मेरा बहलाया गया सोच के हम घबराने लगे है
बढ़ा के फासला अच्छा किया ना तूने जान के अंदाज़ तेरा लगा कर गोते दरिया में दर्द बेशुमार अब हम बढ़ाने लगे हैं
2 महीने पहले
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