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फसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हो गया जिन्हें भुलाए हुए वो भी याद आने लगे हम अपनी आदत के मुताबिक उनसे दिल लगाने लगे
        
                                                    
                            
मैं दूर होकर उनसे दिल से न जुदा हुआ कभी यादें उनकी समेट कर दिल में हम भी तो मुस्कराने लगे
ऐसा नहीं कि भरोसा उन पर किया नहीं कभी अपनी नजर में लाकर उनसे हम अब दिल लगाने लगे
हमने बगैर उनके जीने का इरादा छोड़ दिया है और वो भी बढ़ा कर अरमां अब करीब मेरे आने लगे
सोहबत उनकी भी रही निराली थोड़ी बदनामी के साथ साथ मिली शोहरत सोच कर हम मुस्कराने लगे
2 महीने पहले
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