विज्ञापन

फसाना ए बेखुदी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या सोच कर घबराने आप लगे बचा कर नजर दूर जाने लगे हैं फिर भी ये न बता सके घबरा कर किधर जाएंगे
        
                                                    
                            
ठुकराई मेरी आरजू आपने और गैर के घर जाने लगे अब ये भी बता दो हमें बगैर तुमसे मिले हम किधर जाएंगे
मैं अरमां मिटा सकता नहीं घुट घुट कर जी रहा गर ना सुनेगा तू ही कभी दास्तां मेरी तो ये तो हम किधर जाएंगे
हम वो नहीं जो मिटा के हसरतें सारी दावा करें मोहब्बत का मेरे खुदा बगैर तेरी मर्जी के भी मरने किधर जाएंगे
सच ये तुम ना पा सकोगे हरगिज़ ठिकाना मेरा गर हम ही तुमसे रूठ गए तो बताओ मोहब्बत तेरा किधर पाएंगे

 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all