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फसाना ए बेचैन ख्वाहिशें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसूलों पर दुनिया चलती कहां ये हर कोई जानता है और मिले ना तुम कभी हमसे जिंदादिली से ये हम जानते हैं
        
                                                    
                            
बढ़ा के दर्द चुप होना है रिवाज़ आपका देकर वादे हजार भुला देना है जो भी अंदाज आपका सच हम जानते हैं
ना करो हमें परेशान खिलाफ तेरा कर ना पाऊंगा बदल कर दर्द बढ़ा देना मिजाज़ आपका ये सच हम जानते हैं
बहला के दिल पिछली यादों से इरादा आपका समझ ना कभी पाए इक तू भी तो है खफा क्यूं सच हम जानते हैं
वक्त ए रुखसत मिला ना तू भी तो जिंदादिली से बढ़ा के बेरुखी भुला हमें देने वाले अंदाज़ आपका हम जानते हैं
होकर बर्बाद जिंदा रहने का सलीका सीख लिया मैंने चल कर साथ तेरे घुट घुट के जीना पड़ा सच हम जानते हैं
2 महीने पहले
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