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फसाना ए बदनसीबी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके याद गुज़रा ज़माना ख्वाबों में खो गए हम बढ़ा कर अब खामोशी दिल में बुझा कर दिया आस का खो गए हम
        
                                                    
                            
रहा खफा कब आपकी रुसवाइयों से करके याद गुज़रा जमाना थाम कर दिल अपना ही यादों के मंजर में खो गए हम
बढ़ा के सिलसिला मिला जो दर्द बेशुमार किसी और से कह ना पाऊंगा मैं सोच के अंजाम ए वफा दर्द में खो गए हम
करूं क्या हुआ समझाना बेचैन दिल को मुश्किल बहुत करके याद पिछली बातें तमन्नाओं के सागर में खो गए हम
देकर हिसाब वफाओं का जानता हूं मिलेगा कुछ नहीं जान के आज फसाना ए बदनसीब अपनी दर्द में खो गए हम
3 घंटे पहले
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