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फसाना ए बदनसीबी

                
                                                         
                            करके याद गुज़रा ज़माना ख्वाबों में खो गए हम बढ़ा कर अब खामोशी दिल में बुझा कर दिया आस का खो गए हम
                                                                 
                            
रहा खफा कब आपकी रुसवाइयों से करके याद गुज़रा जमाना थाम कर दिल अपना ही यादों के मंजर में खो गए हम
बढ़ा के सिलसिला मिला जो दर्द बेशुमार किसी और से कह ना पाऊंगा मैं सोच के अंजाम ए वफा दर्द में खो गए हम
करूं क्या हुआ समझाना बेचैन दिल को मुश्किल बहुत करके याद पिछली बातें तमन्नाओं के सागर में खो गए हम
देकर हिसाब वफाओं का जानता हूं मिलेगा कुछ नहीं जान के आज फसाना ए बदनसीब अपनी दर्द में खो गए हम
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2 घंटे पहले

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