विज्ञापन

फसाना ए अर्ज ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल कर कांटों के राह पर दिल को भी तो बहलाना है मिले ना तुम राह ए तलब तो अंजाम ए वफा सोचना है
        
                                                    
                            
गमों से कितनी बार हम टकराए हैं जान कर अंदाज ए बेरुखी आपका करके कोशिश मिजाज़ तेरा जानना है
परख कर नादानियां अपनी सफर में फासला तुमसे हमें रखना पड़ेगा जी के किसी तरह अब फर्ज निभाना है
करके टुकड़े दिल के हम बार बार फिर भी नादानियां हम बढ़ाने लगे करके फैसला आपके दर्द और बढ़ाना है
समझ कर मिजाज़ तेरा चिराग़ ए दिल बुझाना पड़ेगा चल कर साथ दो कदम आपके खुशियां भी मिटाना है
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile