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अहसास ए दर्द ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके तुम कुछ गुस्ताखियां चिराग़ ए दिल मेरा बुझा रहे हो तुम साथ दो या ना दो हमें तो फर्ज अपना निभाना है
        
                                                    
                            
बढ़ा कर हौसला अपना आंखों में तेरे हमें छुप जाना है लगा के गोते बार बार दरिया में अब दर्द अपना बढ़ाना है
ना जाने क्या सोच कर किया ना अहसान आपने मुझ के करके तमाम कोशिश फिर भी फर्ज अपना निभाना है
मिली खुशी हमें अचानक ये जान कर ख्वाहिशें मेरी आप बढ़ा गए चल के तेरी मर्जी के मुताबिक जीना मरना है
करके भरोसा अपनी ही वफाओं पर खाए भी चोट बहुत हुआ गुज़ारा मेरा आसान कब सच आज हमें बताना है

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3 महीने पहले
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