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दास्तां ए बेचैन हसरतें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इसी जमीं इसी आसमां में हम सबको रहना है मैं कोई दुश्मन नहीं तुम्हें ये दिल ओ दिमाग से समझना है
        
                                                    
                            
ये मत सोचना मुश्किल में तेरे काम न आऊंगा दिल मेरा भी है आइना तुम्हें तो अब नीयत मेरी परखना है
मैं खुश हूं अपनी दुनिया और तू अपनी दुनिया में खुश फिर भी दोनो को फलसफा जिंदगी का समझना है
जो कह न सका वो ही मैं कह रहा हूं लिखा जो नसीब में सह कर दोनों को इसी जहां में जीना मरना है
अपने दिल की दास्तां तुझे मैं किसी रोज़ खुल के मैं सुनाऊंगा मगर अभी दोनो को गम में जीना मरना है

 
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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