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अंजाम ए रस्म ए उल्फत

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी गरज के तो कभी बरस के यूं न कभी रुकसत हो तू भी मुझे इस तरह तन्हा छोड़ के
        
                                                    
                            
कभी गुज़र के मेरे करीब से जब कभी चाहो आजमा लो हमें तुम इस तरह तन्हा छोड़ के
तेरे जाने के बाद हाल क्या होता है मेरा कभी आजमा भी ले खुद ही इस तरह तन्हा हो के
सुना है मैने आपको भी मेरी फिक्र रहती है क्यूं न करीब हो जाएं हम दोनो ही तन्हा हो के
खफा न होना तू अभी अर्ज करना तुमसे बाकी है न हो जुदा तुम इस तरह हमें तन्हा छोड़ के
2 महीने पहले
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