विज्ञापन

अंदाज़ ए रस्म ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब्र हुआ कि हमें आप गुजरे दिनों की याद दिला गए दिन तो हमारा बहल गया मगर कल की याद करा गए
        
                                                    
                            
चश्म चश्म गुफ्तगू से दिल का दर्द भुला गए हालांकि बात जरा सी हुई हम अपने दिल की धड़कन बढ़ा गए
वैसे तो हुआ कुछ नहीं तुझे देख के मगर आप बेताब निगाह से बेकरार हमें कर आज जादू अपना चला गए
सच तुझसे अब क्या कहूं करीब तुझे देख कर हम तो सिर्फ तेरी निगाह ए खौफ से डर कर धड़कन बढ़ा गए
हर आइने में मुझे तेरा वजूद दिखा है जादू तेरी निगाह का जब मुझ पे चला है हम मोहब्बत अपनी जगा गए
17 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

sunil kumar

181 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

594 कविताएं

View Profile

Anita Chaturvedi

161 कविताएं

View Profile