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अंदाज़ ए रस्म ए वफा

                
                                                         
                            सब्र हुआ कि हमें आप गुजरे दिनों की याद दिला गए दिन तो हमारा बहल गया मगर कल की याद करा गए
                                                                 
                            
चश्म चश्म गुफ्तगू से दिल का दर्द भुला गए हालांकि बात जरा सी हुई हम अपने दिल की धड़कन बढ़ा गए
वैसे तो हुआ कुछ नहीं तुझे देख के मगर आप बेताब निगाह से बेकरार हमें कर आज जादू अपना चला गए
सच तुझसे अब क्या कहूं करीब तुझे देख कर हम तो सिर्फ तेरी निगाह ए खौफ से डर कर धड़कन बढ़ा गए
हर आइने में मुझे तेरा वजूद दिखा है जादू तेरी निगाह का जब मुझ पे चला है हम मोहब्बत अपनी जगा गए
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16 घंटे पहले

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