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रस्म ए रस्म ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहानी दिल का नाकाम होने लगा समझ बैठा जिसे खुदा बदल कर रस्ता अब वो चिराग़ ए दिल मेरा बुझाने लगा
        
                                                    
                            
सच तो ये है ना हुआ खुदा कभी किसी महरूम का बढ़ा के दर्द ओ तमन्ना दिल में कोशिशें नाकाम मेरा होने लगा
जी कर बुझदिली से अब तो मरना ही अच्छा है मुझसे फासला बढ़ाने वाले तू अब अरमां सारा मेरा बुझाने लगा
लगा के डुबकी तमन्नाओं के दरिया में डूब ना पाया मैं फिर भी सुना के गम सारा अपना तुम्हें दिल मेरा रोने लगा
तू बता कुर्बतों से कब तक दिल हम बहलाएंगे और परख कर अंदाज़ तेरा अब जीना मेरा ही नाकाम होने लगा

 
2 महीने पहले
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