विज्ञापन

अफसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजीब नशा है मुझ पर होशियार रहना चाहता हूं मैं घबरा गया हूं ख्वाबों से अब खबरदार रहना चाहता हूं
        
                                                    
                            
ऐ मौज ए नशा हमें तुझ पर कोई वहम नहीं जो ख्वाब देखा है मैने रात याद कर होशियार रहना चाहता हूं
है तुझे मेरी फिक्र नहीं ये भी जानता हूं मुझ और न रंज कर बढ़ा कर फासला कर तुमसे दूर रहना चाहता हूं
तुमसे कहूं कैसे दर्द मेरे जीने का सहारा है बेशक कुछ और दर्द दो मैं डूब कर गम में बीमार रहना चाहता हूं
करके वादा हमसे इंकार किया तूने अभी अभी मैं लुटा लुटा सा अब सामने तेरे खड़ा हूं जहर पीना चाहता हूं
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all