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अफसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके तकरार तुमसे फिर भी गद्दार मैं हो सकता नहीं सच तो ये होकर वफादार कभी मैं गुनहगार हो सकता नहीं
        
                                                    
                            
होकर मजबूर नसीब से दिल हमें तेरी खताओं से लगाना पड़ेगा बढ़ा के जुनून ए शौक अरमां मैं मिटा सकता नहीं
अच्छा है ऐ दोस्त बढ़ा के दर्द ख्वाब कुछ और हमें तू अब दे जा होकर खफा तुमसे फिर भी दर्द बढ़ा सकता नहीं
तू ना हो सका मेरा तो करूं क्या दर्द समेटना पड़ा चल के कांटों की राह पर अब चिराग ए दिल जला सकता नहीं
सच ये भी जुनून ए शौक मरता कहां कभी बढ़ा कर बेचैन तमन्ना अपनी ही दर्द ये चिराग़ ए दिल बुझा सकता नहीं
2 महीने पहले
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