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अफसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बसे थे जो मेरे दिल में कभी करके बेकरार हमें फासला बढ़ा रहे भुला के वादे फलसफा जिंदगी का हमें बता रहे हैं
        
                                                    
                            
मना कर जश्न बर्बादी कहूं दर्द उनसे कैसे और वो रख कर दिल में ही सवाल हजार चिराग़ ए दिल मेरा बुझा रहे हैं
शायद किसी बहाने पलट के वापस सामने आ ना पाऊंगा कभी करके याद जमाना आपका दिल को समझा रहे हैं
समझा कर बेचैन दिल को करना इबादत होगी ये मजबूरी मेरी निभा के रस्म ए वफा शिद्दत से तुझे आजमा रहे हैं
मुझको आईना दिखाने वाले मत पूछो हाल ए गम मेरा सोच के अब हैसियत अपनी ही सामने तेरे सर झुका रहे हैं
2 महीने पहले
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