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अफसाना ए बेचैन जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तू जबसे हुआ जुदा हम घुंट जहर का पीने लगे तुम्हारी याद में अब होकर बेचैन हम जख्म अपना बढ़ाने लगे
        
                                                    
                            
जख्म जब हद से ज्यादा लगा बढ़ने तो आंसू पीने लगे इक झलक देखने खातिर हम तेरी गली से गुजरने लगे
फिक्र जेब में रख कर मैं जी सकता कभी नहीं दिल में अब दिया आस का जला के दर दर तुमको ढूंढने लगे
बिछड़ कर मुझसे शायद किसी और से दिल लगा लिया तूने जो दर्द दिया महसूस कर अब आंसू हम पीने लगे
कोशिश तो रही हमेशा कभी तेरे काम मैं आ सकूं तूने किया हमें इंकार जब से चश्म सुबह से आंसू बहने लगे
दर्द अपना बयां तुमसे कैसे करूं होकर मजबूर दिल तोड़ने लगे तुम न हो सकोगे मेरे सोच कर दूर होने लगे
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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