मजबूरियों में शौक से दूरी बना लिया ,
जरूरतें जैसी लगी वैसे तराश लिया ,
जिम्मेदारियों का जिम्मा जब जेहन में जग गया हो,
तब ख्वाइशे खुद की ,कुछ रहती नहीं है।