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मजा बहुत परधानी में ।

pravin kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भूल गए ओ सारे वादे ,नशा बहुत परधानी में ।
        
                                                    
                            
सुबह शाम जो साथ लगे थे ,बिसराए परधानी में।
अवसरवादी साथ हो गए ,मजा लिए परधानी में ।
राजनीति में राज बहुत है, नीति सभी परधानी में ।
चापलूस तो मन में भा गए , अपनो से जंग ठान गए।
चमचे सारे ठाट में हो गए ,मजा बहुत परधानी में।
सिद्धांत के सिद्धि ले ली , अन्त किए सब आनी का।
नाम के उनके बिगुल बहुत है, मजा बहुत परधानी में ।
मनरेगा तो मन में भाए, जेसीबी पॉकेट गरमाए,
मिड डे मील में मजा बहुत है, फल और दूध का नशा बहुत है,
ऑन लाइन आवेदन हो गए, कमाने के अवसर हो गए।
धाक जमा बा बानी में, मजा बहुत परधानी में ।
एक महीने पहले
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