जरूरत हो जब भाला की तो माला ले नही सकता,
स्वतः के स्वार्थ सिद्धि में कभी भी गिर नहीं सकता,
पढ़ता मैं नहीं झूठी ,किसी की वाहवाही को।
सियासत के चटोरों में ,भरोसा रख नही सकता