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अंततः स्त्री ही जीवन-साथी के साथ अडिग खड़ी होती है

Prasoon Saxena

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने साथी को कांधे का सहारा देती स्त्री,
        
                                                    
                            
टूटे दिल को जोड़ने की कला वो है जानती,
उसकी कीमत तब पता चलती है,
जब तुम सब कुछ गवां चुके होते हो,
तुम टूट जाते हो,
वो स्त्री ही है जो अपने साथी पुरुष के,
टूटे हुए आत्मविश्वास को जगाना जानती है.

जब असफलता और संघर्ष से पुरुष टूट जाता,
संवेदनशीलता-धैर्य,शक्ति का प्रतिरूप स्त्री,
साथी पुरुष का हौसला पुनर्जीवित वो करती,
वो अपने साथी पुरुष को विश्वास है दिलाती,
आप कर सकते हैं,आपको सफलता मिलेगी,
वो स्त्री ही है जो अपने साथी पुरुष के,
एक नए सफल जीवन का प्रेरणा स्रोत बन जाती है.

जब पूरी दुनिया हाथ खींच लेती है,
वो स्त्री ही है जो जीवन भर साथ है निभाती,
अंततः स्त्री ही जीवन-साथी के साथ अडिग खड़ी होती है.
6 दिन पहले
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Sanjai kumar

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